श्री बरकतुल्लाह खान राजस्थान के मुख्यमंत्री का निधन 11 अक्टूबर 1973 को हुआ था मैं उनको श्रद्धांजलि के रूप में यह ब्लॉग लिख रहा हूं

भला मानूस  बरकतुल्लाह  खां   मुख्यमंत्री मार्च 1971 से 1973 अक्टूबर तक रहे ।भारी भरकम शरीर वाले होते हुए भी अपने कार्य को उन्होंने भलीभांति अंजाम दिया। भारत पाक युद्ध के दौरान  बाड़मेर जिलाधीश के पद पर रहते हुए मैंने उन्हें बहुत नजदीक से देखा।पहली बार जब उनसे मुलाकात हुई तोअक्टूबर 1971 का   महीना था।
 मुख्यमंत्री जी ने मौके की स्थिति का एहसास कर  बाड़मेर आकर हमारा हौसला बढ़ाने का  फैसला किया।  उनकी अध्यक्षता में आयोजित की गई  मीटिंग में मैं उनके बगल बैठा था और उन्होंने आते ही मुझे सब कुछ कान में  बताने को कहा। संक्षेप  मे मैने युद्ध की तैयारी के  बारे मे बताया।
 मैं मीटिंग शुरू होने के पहले अपनी पत्नी से प्राप्त प्राप्त पत्र-पत्र चुपचाप पढ़ने की कोशिश कर रहा था ।यह पत्र निजी था और उसे मीटिंग में मुझे नहीं पढ़ना चाहिए था किंतु 1971 का  भारत- पकिस्तान   युद्ध की सम्भावना  का एहसास हो चुका था और मीटिंग भी इसीलिए आयोजित की थी। मेरी पत्नी गोरखपुर से आने को न केवल तैयार थी वरन  इस बात पर जोर दे रही थी कि उन्हें आना ही है क्योंकि युद्ध के समय उनका मेरे साथ रहना आवश्यक था ।इस प्रकार मै एक असमंजस की स्थिति में था ।तभी मुख्यमंत्री जी  मुझे 
देखकर बोले कान में बोले "क्या पढ़ रहे हो मुझे बताओगे "मैं कुछ कह पाता इसके पहले उन्होंने समझ लिया 'और बोले घरवाली से पत्र आया है।' सहमति के बाद बोले 'क्या लिखा है 'मैंने बताया वह आना चाहती है मेरे साथ रहना चाहती है।  मीटिंग में मुख्यमंत्री जी ने सबको संबोधित कर बता दिया 'कलेक्टर साहब की पत्नी आना चाहती है और वह मना कर रहे हैं'फिर  बोले कलेक्टर साहब की पत्नी उनसे ज्यादा साहसी है।
मैं चाहता हूं कि वह उन्हें आने दे ।' सबका मनोबल बढ़ेगा।सभी लोग हंस पड़े और मीटिंग का बोझिल
 वातावरण हल्का-फुल्का हो गया । 
आगे जब भी मुख्यमंत्री जी बाड़मेर आए सबसे पहले मुझे गले लगा कर बोले 'बेटे बोलो कोई बात हो उसे छुपाना नहीं मैं तुम्हारे साथ हूं' और यह सिलसिला चलता रहा।
  एक घटना हुई जो बाड़मेर में 8-9 दिसंबर 71 की रात्रि में  पाकिस्तान के हवाई आक्रमण के दूसरे दिन की है। मुख्यमंत्री जी जैसलमेर में थे9 दिसंबर 1971 को। बॉर्डर कमिश्नर भीम सिंह जी ने फोन कर बताया कि  मुख्य मन्त्री जी बाड़मेर आना चाहते हैं।उसी समय मैंने फोन पर उन्हें प्रार्थना की कि हम सभी रेलवे स्टेशन पर हुए हवाई हमले के परिणामस्वरूप  फैली अव्यवस्था  को सामान्य बनाने का काम कर रहे थे उसे देखते हुए मुख्यमंत्री जी से आग्रह करें कि वे  अगले दिन आये।भीम सिंह जी बोले 'आप मुख्यमंत्री जी को आने से मना कर रहे हैं' मैंने कहा' उनको  मेरी  प्रार्थना पहुंचा दे।'  मुख्यमंत्री जी अगले दिन आने को सहमत हो गए। मुख्यमंत्री जी ने मौके की स्थिति और गंभीरता का एहसास कर लिया कि मैं उन्हें जानबूझकर अगले दिन आने की प्रार्थना की थी और उन्होंने इसकी सहमति दे दी । 
अगले दिन आए तो हमने  उन्हें  स्टेशन का मौका मुआयाना कराया और  स्थिति से अवगत कराया। 
सबसे पहले उन्होंने मेरा हौसला बढ़ाया  और बेटा 
बोल कर  मुझे गद गदगद कर  दिया। 
15 दिसंबर को उन्होंने हेलीकॉप्टर से छाछरौ   जाकर वहां पर भारत  का झंडा फहराने का 
निश्चय किया ।हम उनके साथ हेलीकॉप्टर में गए।
 उसमें आरएस कूमट एवं  अमिताभ गुप्ता सेना  द्वारा विजित क्षेत्र में सिविल प्रशासक के रूप में आए थे।वह भी हमारे साथ छाछरॉ थे। मुख्य मंत्री की पत्नी उषि खान ने  रास्ते में सूखे मेवा    हम सबको  ऑफर किया ।छाछरो  पहुंचकर तहसील के ऊपर छत पर   हिंदुस्तान का झंडा फहराया गया।  पास में पानी की टंकी थी।तहसील के कस्बे  में जनसंख्या बहुत कम रह गई थी क्योंकि लोग   हिंदुस्तान की तरफ  चले गए थे शरणार्थी बनकर और बाकी सब पीछे दूर हट गए थे ।
यह अनुभव हमारे लिए कभी भूलने वाला नहीं था 
 मुख्यमंत्री जी स्वयं भावनात्मक रूप से हम सब का हौसला बढ़ा रहे थे ।सैनिकों का भी हौसला उन्होंने बढ़ाया और अस्पताल जाकरके उनके  कुशलता  पूछी।
युद्ध समाप्त होने के बाद मुख्यमंत्री जी ने 
 सेना   अधिकारियों एवं सिविल सेवा के अधिकारियों को अपनी ओर से रात्रि भोज दिया । रात्रि भोज बाड़मेर क्लब के टेनिस कोर्ट पर आयोजित किया गया था और चारों तरफ कनात लगाकर ऐसी व्यवस्था की गई थी कि सेवा के अधिकारी अपने  अनुशासन पूर्वक बैठ सके
 उनके लिए ड्रिंक की व्यवस्था भी  की गयी था।
  जेनटलमैंन मुख्यमंत्री  बरकतुल्लाह  खां  का व्यक्तित्व   मेरी  यादों  में अविस्मरणीय रहेगा।

Comments

  1. Excellent way to remember a great human being ,unlike a politician but an able administrator.
    Such fond memories are your precious treasure.
    I too pay my tribute to Lt Shri Barkatullah Khan Sahib and lt Smt .Unhi Khan,his true life partner
    Sunayan Sharma

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